गुरुवार, अप्रैल 30, 2020

मजदूर

मजदूर कर्मयोगी  है
अपने साधना के पथ का,
रहता है निरंतर
प्रयासरत ,
पूरी करने के लिए
औरों के जीवन
के अनुष्ठान को |
करता है
जीवन अपना होम
जिसमें जलती  हैं
उसकी समस्त आकांक्षाएँ
यही है मजदूर की परिभाषा !
"लारा"

ख़ुदा से ली हुई उधार है ज़िदगी

कभी गुल कभी ख़ार है ज़िंदगी
कभी जीत कभी हार है ज़िंदगी
जब चाहे वो हमसे वापस ले ले
 ख़ुदा से ली हुई उधार है ज़िदगी
"लारा"

मंगलवार, अप्रैल 28, 2020

गीत : सुख दुख का है ताना बाना

सुख दुख  का है  ताना बाना
जीवन में इनका  आना जाना

जैसे   दीपक  संग  है   बाती
सुख- दुख हैं जीवन के साथी
चाहिए  जीने    का    बहाना
जीवन में  इनका  ताना बाना


 
दुःख   दर्शाती   है    मजबूरी
है रिश्तों की भी परख ज़रूरी
ग़म से मन को  मत  भरमाना
जीवन में  इनका  ताना  बाना


कुछ अपने भी  छल  जाएँगे
 गर  हालात    बदल  जाएँगे
हँसना और   सदा   मुस्काना
जीवन में इनका  ताना  बाना

"लारा"

रविवार, अप्रैल 26, 2020

पर कागज़ पर चलता नही जीवन का जहान

भूख और ग़ुरबत ने ले ली कई लोगों की जान
बनती ऐसी चर्चित पँक्तियाँ अखबारों की शान
पर कागज़ पर चलता नही जीवन का  जहान
देगा सबकी वक़्त  गवाही मत  घबरा   नादान
"लारा"

शनिवार, अप्रैल 25, 2020

संबंधों की कुटिल व्याख्या महाभारत अंजाम

नग्न हुई जब भी मर्यादा लज्जा झुक शरमाई
सत्ता की लालच में अंधे हो टकरा गए  भाई
संबंधों की कुटिल व्याख्या महाभारत अंजाम
देता  सबकी वक़्त गवाही मत  घबरा  नादान

"लारा"

गुरुवार, अप्रैल 23, 2020

विश्व पुस्तक दिवस पर

विश्व पुस्तक दिवस की बधाई

अक्षर -अक्षर अमर  हो  गए पाकर रूप किताबों के
भाव उतर आए पन्नों में बढ़ गए क़ीमत जज़्बातों के
दोहे गीत ग़ज़ल कोई किस्सा कविता या फिर चौपाई
विषय बने दुनियादारी कुछ राजनीतिक हालातों  के

"लारा"

बुधवार, अप्रैल 22, 2020

गीत --- देगा सबकी वक़्त गवाही मत घबरा नादान

मानवता की समझ नहीं फिर कैसा  इंसान
देगा सबकी वक़्त गवाही मत घबरा नादान

 


सड़कों पर बेबस सोती है भूख और बेकारी
महलों भीतर राज करे छलियों की चाटुकारी
इनके सम्मुख पानी भरते विभूतियाँ  महान
देगा सबकी वक़्त गवाही मत घबरा  नादान

दिल के भीतर दर्द छिपाए होठों पर मुस्कान
बाणों की शैय्या पर तड़पे जैसे भीष्म महान
हो  कर रह गया जीवन सबका एक  संग्राम
देगा सबकी वक़्त गवाही मत घबरा  नादान



जब चलती वक़्त की चाल कुटिल होती है
बीच व्यूह में अभिमन्यु सा मर्यादा  रोती  है 
तब खंडित हो जाता निर्धन जन का सम्मान 
देगा सबकी वक़्त गवाही मत घबरा  नादान


सच कहते हैं लोग होता वक़्त बड़ा बलवान
बड़े बड़े का हो जाता है चूर यहाँ अभिमान
इठलाया था रावण भी पा  मुँहमाँगा वरदान 
देगा सबकी वक़्त गवाही मत घबरा  नादान 


लोग होके हलकान धरती अम्बर को ताकें
आकर कोई पढ़े वेदना उनके मन में झाँके
कोरे कागज़ से रह जाते  हैं उनके अरमान
देगा सबकी वक़्त गवाही मत घबरा नादान





भूख और ग़ुरबत ने ली कई लोगों की जान
बनती ऐसी चर्चित पँक्ति अखबारों की शान
समझौतों से चलता नहीं जीवन का जहान
देगा सबकी वक़्त गवाही मत घबरा नादान

" लारा मल्होत्रा नैय्यर ( रजनी)
बोकारो थर्मल ( झारखंड )

मंगलवार, अप्रैल 21, 2020

कोरोना गीत


क़ुदरत की है बड़ी चुनौती मानस औ विज्ञान को
ग्रहण लगेगा घर से बाहर निकले  हर इंसान को 


विश्व के कई देश विवश हैं और हुए लाचार बड़े
मौत का तांडव देखते हैं हाथ बाँधे मूक हुए खड़े
गुप्त शत्रु का वार है ये मत भूलिए इस संज्ञान को 
ग्रहण लगेगा घर से बाहर निकले हर इंसान  को

आज से अधिक कठिन होगा आनेवाला जो कल है 
 क्रोधित है क़ुदरत जिससे मिल रहा ये प्रतिफल  है
 छल बल से  वो लगा हुआ है मानव के सन्धान को 
ग्रहण लगेगा घर से   बाहर  निकले हर   इंसान  को 



है कोई क़ुदरत की आपदा या जैविक हथियार  है
ये तो विश्व के समूल नाश को लालायित  तैयार है 
व्यर्थ नही  होने देंगे  इस युद्ध में हुए बलिदान  को 
ग्रहण लगेगा घर से  बाहर  निकले हर   इंसान  को


अपने धैर्य की है ये  परीक्षा इसे नहीं  खोने  देंगे
भारत को हम इटली   यू एस चीन नहीं होने देंगे 
कई वर्षों  कर देगा पीछे ये जीवन  के उत्थान को 
 ग्रहण लगेगा घर  से  बाहर निकले हर इंसान  को 


 बुरा वक्त भी टल जाएगा सबका वक़्त बदलता  है 
 पतझड़ के आने से ही तो पुष्प  बाग में  खिलता है 
 भेदरहित हो नाश करें इस मानव के व्यवधान को 
 ग्रहण लगेगा घर से बाहर निकले हर    इंसान   को

" लारा मल्होत्रा नैय्यर
बोकारो थर्मल झारखंड

सोमवार, अप्रैल 13, 2020

कोई पल न रीता जिसमें  तेरी दिखी परछाई नहीं
दिन बदले मौसम बीते तेरी ममता की  गहराई  में

शनिवार, अप्रैल 11, 2020

मुक्तक

बदले कितने व्यवहार इस तालाबंदी से
जुड़ गए दिलों के तार इस तालाबंदी से
गृहस्थी की गाड़ी भी पटरी पर चल रही
पर कुछ भ्रम भी टूटेंगे इस तालाबंदी से

"लारा",