चाहता,
अगर मै तो,
तेरी,
हर कसम को ,
तोड़ जाता,
मिलने की,
बेकरारी,
इस कदर थी,
हर पहरे को ,
तोड़ जाता,
तुने ही,
रोका,
तेरे शहर ,
न आने को,
पर ,
मेरी ख्वाहिश से,
पहले,
तेरी खुशियाँ ,
देखी मैंने,
ना होता,
तेरा फिकर तो,
खरीदार,
बहुत थे,
बाज़ार में,
बिकने चला,
जाता,
पर,
बेमोल बिक गए,
हम तो,
तेरी ,
एक मुस्कान पर.
"rajni"
गुरुवार, दिसंबर 03, 2009
बेमोल बिक गए, हम तो, तेरी , एक मुस्कान पर.
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 3.12.09 6 comments
Labels: Poems
मैंने एक महल बनाया है ख़्वाबों का
मैंने एक,
महल बनाया है ,
ख़्वाबों का,
इसमें,
रंग भरे हैं ,
मेरे सपनों ने,
प्रेम की,
विश्वास की दीवारें हैं,
और,
चुलबुली सोंच,
ईसमें,
लहराते हैं ,
चिलमन बन कर,
इस महल में ,
मेरे साथ,
मेरे सपनों का,
शहजादा है,
जिसके साथ,
ताउम्र ,
इस महल में,
राज करने का,
दिल का इरादा है.
"रजनी"
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 3.12.09 2 comments
Labels: Poems
बुधवार, दिसंबर 02, 2009
क्या पा लिया तुमने हमको रुलाके ?
क्या पा लिया तुमने हमको रुलाके ?
क्या मिल गया तार दिल के हिला के?
टूट कर कुछ भी जोड़ना,
जब मुमकिन नहीं,
क्या पाओगे अब?
टुकड़े दिखा के,
बिखर गये जब धागे से मोती,
छीन गये जब दीप से ज्योति,
क्या जोड़ पाओगे अब ?
बिखरे हुए मोती.
क्या कर पाओगे रोशन ?
बुझी हुई ज्योति.
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 2.12.09 0 comments
Labels: Poems
मंगलवार, दिसंबर 01, 2009
एक ख्वाब, एक ख्याल, एक हकीकत हो तुम,
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 1.12.09 2 comments
Labels: Poems
सोमवार, नवंबर 30, 2009
ये प्रीत का सन्नाटा है, जिसकी ख़ामोशी में भी कोलाहल है
ये कैसा सन्नाटा है ?
जिसकी ख़ामोशी में भी कोलाहल है.
ये कैसा अमृत है ?
जिसकी हर घूंट में हलाहल है.
ये कैसा उदगार है ज्वालामुखी का ?
जिसके फटने से बस संहार ही संहार है.
ये कैसा ख्वाब है ?
जिसे बुनने को बेकल सारा संसार है.
ये प्रीत का सन्नाटा है,
जिसकी ख़ामोशी में भी कोलाहल है.
ये प्रीत अमृत है,पर
इसके हर घूंट में हलाहल है.
ये प्रीत एक ज्वालामुखी है,
जिसके फटने से संहार ही संहार है.
ये प्रीत एक सुहाना ख्वाब है,
जिसे बुनने को बेकल सारा संसार है.
ये प्रीत हर किसी के लिए नहीं आसान है,
किसी को मिल जाये तो वरदान है,
ना मिले तो अभिमर्दी है.
ये प्रीत का सन्नाटा है,
जिसकी ख़ामोशी में भी कोलाहल है|
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 30.11.09 4 comments
Labels: Poems
रविवार, नवंबर 29, 2009
चाहत अगर पूरी हो जाए
चाहत अगर पूरी हो जाए,
तो चाहत ख़त्म नहीं होती,
और अगर वो ख़त्म हो जाए,
तो वो सच्चा प्रेम नहीं.
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 29.11.09 4 comments
Labels: Poems
आसमां से गिरे कही नहीं बच पाते हैं
दिल जुड़ने न देना,
कभी किसी भी ,
हालत में,
जब टूट जाए ,
बड़ा दर्द देता है,
धड़कनों को झूठी ,
लगन ना लगे,
आसमां से गिरे,
कही नहीं बच पाते हैं.
कभी हसरतों को,
जागने ना देना,
टूट जाएँ तो ,
जीने ना देंगे ,
ये अरमा,
टूटी हुई कांच को ,
जोड़ना जैसे कठिन है,
टूटने पर,
जुडेंगे न ये अरमां.
"रजनी"
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 29.11.09 0 comments
Labels: Poems
तेरी तारीफ में कितना लिखे कोई
तेरी तारीफ़ में कितना लिखे कोई,
कम ही लगता है जितना लिखे कोई,
ये उम्र तो कम ही लगने लगी,
सात जन्म भी कम लगे इतना लिखे कोई,
नशा में लिखू तो शराबी कहोगे,
बिन पिए ही लिखा है,
ऐसे लिखे जैसे सपना लिखे कोई,
गजल खुद ब खुद बन जाती है,
जब भी तेरा बोलना,तेरी आवाज़ लिखे कोई,
तुझमे और तेरी आवाज़ में वो जादू है,
तेरा रुकना और तेरा चलना लिखे कोई,
तेरी तारीफ में कितना लिखे कोई,
कम ही लगे जितना लिखे कोई,
किसी कि गजल में वो बात नहीं,
नया क्या लिखे, जब अपना लिखे कोई,
तेरी तारीफ में कितना लिखे कोई,
कम ही लगता है जितना लिखे कोई.
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 29.11.09 0 comments
Labels: Poems
उन्होंने हमसे जुदाई मांग ली
इस कदर खुश हो गए उनपर,
कि बातों बातों में हमने कह दिया,
मांगलो हमसे जो चाहो आज,
उन्होंने हमसे जुदाई मांग ली,
और हमने इकरार भर दिया,
आँखें कह रही थी कुछ और,
होंठो ने कुछ कह दिया,
रो रहे थे दोनों,जिसे उन्होंने,
मेरा हँसना समझ लिया|
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 29.11.09 0 comments
Labels: Poems
मत जला चिरागों को , मुझे अँधेरे में रहने की आदत है
खीच ले क़दम धंसने से पहले,
मुझे काँटों से भी निभाने की आदत है.
छेड़ के बाम्बी को, विषधर की,
क्यों गरल की चाहत लेते हो,
जो जलकर धुआं - धुआं हो गया,
क्यों उसमें , मिटने को उद्धत होते हो,
मत जला चिराग़ों को ,
मुझे अँधेरे में रहने की आदत है|
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 29.11.09 0 comments
Labels: Poems
