हर घर में जले दीप न हो कोई सवाली
हिल मिल के मनाएँगे सभी लोग दीवाली
"डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर "
डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर ( लारा ) झारखण्ड बोकारो थर्मल से । शिक्षा -इतिहास (प्रतिष्ठा)बी.ए. , संगणक विज्ञान बी.सी .ए. , हिंदी से बी.एड , हिंदी ,इतिहास में स्नातकोत्तर | हिंदी में पी.एच. डी. | | राष्ट्रीय मंचों पर काव्य पाठ | प्रथम काव्यकृति ----"स्वप्न मरते नहीं ग़ज़ल संग्रह " चाँदनी रात “ संकलन "काव्य संग्रह " ह्रदय तारों का स्पन्दन , पगडंडियाँ " व् मृगतृष्णा " में ग़ज़लें | हिंदी- उर्दू पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित । कई राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित ।
हर घर में जले दीप न हो कोई सवाली
हिल मिल के मनाएँगे सभी लोग दीवाली
"डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर "
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 3.11.21 1 comments
ज़मज़म के पानी सी पावन,गंगाजल सी निर्मल है
ख़ुशियों का सागर है बेटी , बेटी है तो ही कल है
बिन इसके जीवन सूना, जैसे ग़मों का क्रंदन है
ये है दिल की धड़कन सी ,जैसे साँसों का स्पंदन है
रिश्तों की मीनारें इनसे ये झरनों की कल-कल है
ख़ुशियों का सागर है बेटी, बेटी है तो ही कल है
ईश का दिया वरदान है बेटी,अधरों की मुस्कान है
महादान का पुण्य दिला दे,ये वो अमोघ सामान है
तपती धरा में शीतल छाया मरुभूमि में ये जल है
ख़ुशियों का सागर है बेटी, बेटी है तो ही कल है
इसकी साँसों की माला पर इसका ही अधिकार है
ये मानव की जननी , इससे मानव का विस्तार है
करुणा,स्नेह,त्याग से भरकर मन बेटी का निश्छल है
ख़ुशियों का सागर है बेटी, बेटी है तो ही कल है
जिसे भूलना आसान नहीं, उसी बात का संज्ञान नहीं
पूजी जाती थी नारी यहाँ, पर अब वो हिंदुस्तान नहीं
कंटक, खार भरा बेटी के जीवन का अब हर पल है
ख़ुशियों का सागर है बेटी , बेटी है तो ही कल है
डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर
बोकारो थर्मल (झारखंड)
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 26.9.21 0 comments
अक्स अपना देखने को चाँद जब बेताब था
आइना बन आ गया दरिया तब उसके सामने
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आज यादों के दरीचे को खुला रहने दिया
साथ बीते पल सुहाने चलचित्र से आ गए
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मुहब्बत के लिए मख़्सूस है बारिश का मौसम ही
सजन आजा चला जाए न ये बरसात का मौसम
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नचाती है सभी को ज़िंदगी ये
तमाशाई बने सब देखते हैं
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तू दे कभी गुलाब मुझे इंतज़ार है
इज़हार मैं करूँगी तुझे इंतज़ार
"डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर"
बोकारो थर्मल झारखंड
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 14.9.21 3 comments
लेखनी का गान हिंदी
आपकी पहचान हिंदी
चेतना औ ज्ञान इससे
वाणी का वरदान हिंदी
"रजनी"
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 14.9.21 4 comments
ख़ुशियों के साथ मेरा आशियाना हो गया
दर्द दरिया बन बहा औ मुस्कुराना हो गया
रास अब आने लगा है साथ होना आपका
आप नज़राना मिले दिल शायराना हो गया
छल रहा था ये जहाँ मुझको परख के नाम पर
की पलट कर वार तो दुश्मन ज़माना हो गया
ज़िंदगी तेरी कसौटी अब नहीं मंजूर है
ज़िंदगी कह दे मुझे अब आज़माना हो गया
मत दुहाई दो किसी को साथ के नाम पर
साथ रह कर जब कठिन रिश्ता निभाना हो गया
"रजनी मल्होत्रा नैय्यर
बोकारो थर्मल (झारखंड)
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 29.8.21 0 comments
दशरथ के घर पुत्र रूप में जन्म लिए थे रघुवर जी
एक घड़ी फिर ऐसी आई हुए राम जी वनवासी
अवधपुरी में सभी ओर बस राम राज की थी चर्चा
किया मंथरा की बातों ने मन भारी कैकेई का
कोपभवन में हारे राजा और हुईं विजयी रानी
एक घड़ी फिर ऐसी आई हुए राम जी वनवासी
पुत्र धर्म का पालन करने चले राम जी वन में रहने
और संग में पत्नी सीता साथ अनुज लक्ष्मण भी चले
मात-पिता गुरु और महल सँग छोड़ी अपनी नगरी
एक घड़ी फिर ऐसी आई हुए राम जी वनवासी
हाथ जोड़कर जन-जन करते श्रीराम जी का वंदन
मत जाओ वन मत जाओ वन मत जाओ हे रघुनन्दन
चौदह वर्ष नयन तरसेंगे प्रभु दरस के अभिलाषी
एक घड़ी फिर ऐसी आई हुए राम जी वनवासी
क्या अंतर नारायण नर में नियति बड़ी दुखदायी है
भटक रहे वन-वन भाई द्वय दशा दुखी रघुवर की है
सभी राजसी भोग छोड़कर रीति संत की अपनायी
एक घड़ी फिर ऐसी आई हुए राम जी वनवासी
लंकापति ने रची योजना हरण सिया का करने की
और लक्ष्मण की रेखा से बाहर निकलीं सीता जी
लंकापति ले उनको भागा विकल हुए जग के स्वामी
एक घड़ी फिर ऐसी आई हुए राम जी वनवासी
राम लखन जब सिया खोज में किष्किंधा तक आ पहुँचे
महाबली बजरंगबली अपने प्रभु से तब वहाँ मिले
मूर्छित हुए लखन जब युद्ध में तो घबराए अवतारी
एक घड़ी फिर ऐसी आई हुए राम जी वनवासी
रावण का वध किये रामजी हुआ युद्ध भीषण भारी
राम लौटकर वापस आए हर्षित हुए अवध वासी
जगमग-जगमग दीपों से तब हुई अवध की गली गली
एक घड़ी फिर ऐसी आई हुए राम जी वनवासी
"रजनी मल्होत्रा नैय्यर
बोकारो थर्मल झारखंड
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 9.8.21 0 comments
जलाने की क्या ख़ूब सजा देता है
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 28.6.21 1 comments
त्याग समर्पण प्यार पिताजी
खुशियों का संसार पिताजी
हर शय वो क़दमों में रख दें
सुख का हर आधार पिताजी
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छत औ दरों-दीवार पिताजी
बीच भँवर पतवार पिताजी
मजबूती से थामें हर पल
गृहस्थी का भार पिता जी
"रजनी"
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 19.6.21 0 comments
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 7.6.20 2 comments
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 3.6.20 10 comments