सोमवार, मार्च 21, 2022

ले गुलाबी दुआ, जा तुझे इश्क़ हो (ग़ज़ल)

 होली हास्य में डूबी हुई एक ग़ज़ल 👇


आज उसने कहा,जा तुझे  इश्क़  हो

हाल दिल का सुना,जा तुझे इश्क़ हो


दिलरुबा कोई तुझको मिले प्यार से

तू भी हो बावरा, जा  तुझे  इश्क़  हो


हिज्र  का ग़म  तुझे भी  सताये कभी

तू  करे  रतजगा, जा  तुझे  इश्क़  हो


क्यों  दहलता  है तू  प्यार के नाम से

इश्क़ में  डूब जा, जा  तुझे इश्क़  हो


कौन  देता किसी  को हसीं  ये  दुआ

ले  गुलाबी  दुआ, जा  तुझे इश्क़  हो


डॉ. रजनी मल्होत्रा नैय्यर

बोकारो थर्मल, झारखंड

7 comments:

yashoda Agrawal ने कहा…

आपकी लिखी रचना  ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" मंगलवार 22 मार्च 2022 को साझा की गयी है....
पाँच लिंकों का आनन्द पर
आप भी आइएगा....धन्यवाद!

Jyoti Dehliwal ने कहा…

बहुत सुंदर।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि के लिंक की चर्चा कल बुधवार (23-03-2022) को चर्चा मंच     "कवि कुछ ऐसा करिये गान"  (चर्चा-अंक 4378)     पर भी होगी!
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सूचना देने का उद्देश्य यह है कि आप उपरोक्त लिंक पर पधार कर चर्चा मंच के अंक का अवलोकन करे और अपनी मूल्यवान प्रतिक्रिया से अवगत करायें।
-- 
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 

नूपुरं noopuram ने कहा…

बेहतरीन! मज़ा आ गया !
जा तुझे इश्क हो !

😂

रेणु ने कहा…

आज उसने कहा,जा तुझे इश्क़ हो
हाल दिल का सुना,जा तुझे इश्क़ हो

दिलरुबा कोई तुझको मिले प्यार से
तू भी हो बावरा, जा तुझे इश्क़ हो
बहुत ही भावपूर्ण अभिव्यक्ति प्रिय रजनी जी।क्या खूब लिखा---
जा तुझे इश्क हो 👌👌🙏

शुभा ने कहा…

वाह!खूबसूरत सृजन

Sudha Devrani ने कहा…

जा तुझे इश्क हो..ये गुलाबी दुआ...
इश्क का रोग और दुआ !
बहुत सुन्दर सृजन
वाह!!!