आपसभी को नवरात्री की हार्दिक शुभकामनाएं...........
नवरात्री में नवदुर्गा से मन की कामना ये है .........
नवरातों के नव दिनों में मांगूँ झोली पसार,
हर प्राणी में हो जाये माँ स्नेह का संचार.
फिर से हो रहा सत्य धराशायी,डोल रहा संसार,
अब रूप बना ले फिर काली का दुष्टों को संहार.
ये विनती श्रद्धा से झोली पसार,
ये विनती श्रद्धा से झोली पसार.
छल और कपट भर गए मन में,झूठ बना व्यापार,
फिर से हो रहा सत्य धराशायी,डोल रहा संसार.
पुण्य जाने कहाँ खो गया,हुई पाप की जय जयकार.
भर गया पाप का घट फिर से,बढ़ गया अत्याचार.
फिर से हो रहा सत्य धराशायी,डोल रहा संसार,
अब रूप बना ले फिर काली का दुष्टों को संहार.
नवरातों के नव दिनों में मांगूँ झोली पसार,
हर प्राणी में हो जाये माँ स्नेह का संचार.
"रजनी मल्होत्रा नैय्यर".
गुरुवार, अक्टूबर 07, 2010
नवरात्री में नवदुर्गा से मन की कामना ये है ...
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 7.10.10 10 comments
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बुधवार, अक्टूबर 06, 2010
बुझने लगते हैं दीये हौसलों के, जब बुरे वक़्त की आंधी चलती है
जब बुरे वक़्त की आंधी चलती है |
डगमगाते हैं हम राहों में जीवन के,
बुद्धि नाकाम हो हाथ मलती है |
जो ना हारें नाकामी से डर के,
तक़दीर सदा संग उनके चलती है |
चीर जाते हैं जो सीना लहरों के,
उनसे दुनिया मिलने में जलती है |
क्यों कमजोर हों आगे वक़्त के,
ज़िन्दगी ऐसे ही करवटे बदलती है|
बुझने लगते हैं दीये हौसलों के,
जब बुरे वक़्त की आंधी चलती है|
"रजनी मल्होत्रा नैय्यर "
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 6.10.10 3 comments
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मंगलवार, अक्टूबर 05, 2010
जब , खुशियाँ आती है, तो सौ रंग चढ़ जाते हैं
स्वागत किया था
मैंने |
दर्द के पहले क़दम का
ख़ुशियों के रूप में,
जब पहली दस्तक
दिया था उसने
तुम्हारे रूप में |
मेरे जीवन में ,
प्रवेश हुआ
जब धीरे धीरे वो
मेरे अंतर्मन में ,
अपना
आधिपत्य जमाने लगा |
जब यक़ीन हो गया उसे
मेरे रग रग में वो
समा चुका है,
फिर धीरे से उसने
अपना रंग दिखा दिया
क्योंकि जब ,
खुशियाँ आती है
सौ रंग चढ़ जाते हैं |
पर जाती है तो
दे जाती है ,बस
विरानियाँ ,बेचैनियाँ
और ,
जीवन भर के लिए
एक ख़ालीपन|
जिसके भराव के लिए
कुछ भी ,
पूरा नहीं मिलता |
"रजनी मल्होत्रा नैय्यर "
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 5.10.10 5 comments
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जानते हैं हम तन्हा हो जायेंगे
हाथ रख कर वो दुखते रगों में मेरी,
बातों के तीर जिगर में चुभा देते हैं,
जानते हैं हम तन्हा हो जायेंगे,
क्यों गिन कर रुखसती के दिन बता देते हैं.
"रजनी मल्होत्रा नैय्यर "
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 5.10.10 3 comments
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सोमवार, अक्टूबर 04, 2010
इन्सान की शक्ल में जहाँ हैवान बस जाते हैं
इन्सान की शक्ल में जहाँ हैवान बस जाते हैं,
वहां आसानी से जज्बों के मकान बह जाते हैं.
लाख छल से लोग अपनी बात में भारी हों,
एक दिन तो सच के आगे खामोश रह जाते हैं.
"रजनी नैय्यर मल्होत्रा".
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 4.10.10 3 comments
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शुक्रवार, अक्टूबर 01, 2010
ये सोने की चिड़िया चहकेगी कैसे
हर डाल पर शिकारियों ने तीर साधे हैं|
क्या करेंगे वो सन्तान का कर्तव्य पूरा,
जिन्होंने माँ को आपस में बांटे आधे -आधे हैं |
झेलती ग़रीबी और लाचारी के मारे ,
आधी जनता लोमड़ी, आधी सीधे- साधे हैं |
सफेदी में छूपे हैं नक़ाब कालेपन के,
हर वादे पर चढ़े एक झूठे वादे हैं |
आज़ादी की सांसे लग रही भारी इन्हें,
फिर से ज़ंजीरों में जकड़ने के इरादे हैं |
ये सोने की चिड़िया चहकेगी कैसे,
हर डाल पर शिकारियों ने तीर साधे हैं|
"रजनी मल्होत्रा नैय्यर ".
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 1.10.10 7 comments
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नमन आपको
जिन्हें कहा गया गुदडी का लाल आज उनका भी पावन जन्मदिन है (लाल बहादुर शास्त्री)आज गाँधी जयंती है
मोहनदास करमचंद गाँधी, महात्मा गाँधी, बापू, शान्ति और अहिंसा के प्रतीक, हमारे राष्ट्रपिता का जन्म आज के ही दिन 1869 में गुजरात के पोरबंदर में हुआ|
हमने जो आज़ादी की हवा को महसूस किया है अपने सांसो में, तो वो देन उन्ही महापुरुषों की है जिन्होंने हमें ये आज़ादी दिलाने में कितने इम्तिहान दिए ज़िन्दगी के हर सुख चैन को लूटा कर . उनसे मिली इस आज़ादी की सौगात को हमें प्रेम भाईचारे ,और एकता से निभाना चाइए ,पर आज तो देश की जो हालत होती जा रही ऐसा लगता है जल्द ही फिर कोई गुलामी की ज़ंजीर न जकड ले हमें.........क्योंकि जिस सूत्र में हमें बंधे रहने का मूल मंत्र दिया गया था उसे तो कबका भूल चुके हैं और आज अपनी ही हित में सब लग गए हैं पहले अपनी रोटी सीके बाद में कुछ हो .....देश का, समाज का क्या होगा इससे .........जब बांधनेवाली डोरी ही टुकड़े में बाँटने का प्रेरणा दे ,तो कैसे उस डोरी से बंधे रहने का उम्मीद की जाये .............हमें आपसी मतभेद, जाति ,पाती ,धर्म, मजहब सब भूलकर एकता और सही मार्ग को अपनाना होगा ...........तभी पाए गए आज़ादी के मूल्य को चूका पाएंगे उन महापुरुषों को .जिन्होंने आत्म बलिदान देकर हमें ये सुनहरा भविष्य दिया ..........गाँधी जी ने सारी जीवन बस २ धोती में गुजार दिया ,क्या आज वो संयम नज़र आता है किसी भी राष्ट्र के कर्णधार में ,जो बापू में थी. आज समाज को नए दिशा देने की जरूरत है...........तभी हमारा आनेवाला कल फिर किसी बेड़ियों के बंधन से मुक्त रहेगा.........बापू अपने कर्मो से ही आज विश्व में जाने और माने जाते हैं आइये हम भी कुछ ऐसा करें जिससे युगों युगों तक सत्कर्म के रूप में याद रखे जाएँ लोगो के दिल में ...........जय हिंद , जय बापू की ........
"रघुपति राघव राजा राम, पतित पवन सीता राम ,
भज प्यारे तु सीताराम इश्वर अल्लाह तेरो नाम,
सब को सन्मति दे भगवान".
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जिन्हें कहा गया गुदडी का लाल आज उनका भी पावन जन्मदिन है (लाल बहादुर शास्त्री)लालबहादुर शास्त्री , जिनका जन्म २ अक्टूबर १९०४ में एक गरीब परिवार में ,मुग़ल सराई में हुआ .कर दिया अपने राष्ट्र को समर्पित अपना सारा जीवन , और हमें आज की ये आज़ादी भरी ज़िन्दगी देने को ख़ुद न्योछावर कर दिया देशप्रेम और सच्चाई के लिए ये महापुरुष लोग हँसते हँसते बलिदान हो गए .और दे दी हमें अपने लगाये हुए गुलशन का सारा बहार ये कह कर की अबसे इस चमन के तुम सब ही रखवाले हो..हमने उनके द्वारा लगाये चमन को अपने ही हाथों उजाड़ने में लगे हैं.....
इन दोनों महापुरुषों को हमारा श्रधा भरा नमन जिनकी आज पावन जन्मदिवस है ...
"रजनी मल्होत्रा नैय्यर"
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 1.10.10 4 comments
गुरुवार, सितंबर 30, 2010
आह अभी तू यूँ दस्तक ना दे
"आह अभी तू यूँ दस्तक ना दे,
दर्द अभी भरा नहीं,
छलका नहीं गम के प्यालों से,
जब वो बिखर जाये पलकों से,
आ जाना तब मेरे रुखसारों पे."
"रजनी मल्होत्रा नैय्यर."
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 30.9.10 4 comments
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आज का कोर्ट का फैसला जो भी हो हम एक हैं हिन्दुस्तानी .
"घर फूटेगा तो गंवार लूटेगा,देश टूटेगा तो गद्दार लूटेगा."
आज का कोर्ट का फैसला जो भी हो हम एक हैं हिन्दुस्तानी .जाति पाति में ना बाँट कर धर्म मजहब में ना बाँट कर ,एकता के सूत्र में बंध कर देखें .हम कमजोर हैं जब लड़ते हैं ,ताकतवर हैं जब एक हैं आज फिर इम्तिहान की बारी है अपने बंधुत्व को बनाकर रखना है हमें, ऐसा ना हो की फिर हमारी एक भूल किसी फिरंगी को फायदा उठाने का मौका दे दे. ऐसे भी भारतीय एकता को तोड़ने में दुश्मन सदा लगे रहे . पर कामयाब ना हो सके,हम हिन्दू मुस्लिम सिक्ख इसाई ना होकर माँ भारती के संतान हैं ,और किसी भी बात को शांति से हल करना ही बुद्धिमानी है .और वो वक़्त आ गया है जब हमें अपनी एकता को बना कर रखना है शांति बना कर रखना है..........
बस इस बात को हर भारतीय याद रख ले.............
" घर फूटेगा तो गंवार लूटेगा,
देश टूटेगा तो गद्दार लूटेगा."
"रजनी मल्होत्रा नैय्यर "
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 30.9.10 1 comments
रविवार, सितंबर 19, 2010
जरा अँधेरा होने से रात नहीं होती
जरा अँधेरा होने से रात नहीं होती,
अश्कों के बहने से बरसात नहीं होती.
दीपक के बुझ जाने से,
ज्योति गरिमा नहीं खोती.
दीया खुद जलकर,
औरों को रौशनी देता है.
खुद तो जलता रहकर ,
अन्धकार हमारा लेता है.
ये देता सीख हमें,
अच्छाई की राह पर चलना.
दीया की तरह ही जलकर हम भी ,
औरों को रौशनी दे पाए.
कुछ करें ऐसा जिससे ,
जीवन सफल ये कहलाये.
छोटी सी ये दीया की बाती,
पाती हमें ये देती है.
बदल जाता जहाँ ये सारा,
हम भी हर लेते किसी के गम.
पर ये बात अब कहाँ रह गयी,
मतलबी दुनियाँ में कहाँ ये दम.
हम अपने अंदर ही इतने हो गए हैं गुम ,
कौन है अपना कौन पराया मालूम नहीं .
खुद को लगी बनाने में ये दुनिया,
किसी की किसी को खबर नहीं,
दो वक़्त की रोटी कपड़ा में,
अब तो किसी को सबर नहीं.
जल जायेगा जहाँ ये सारा,
सारी दुनिया डूबेगी.
सदी का अंत लगता है आ गया,
गहराई में डूबोगे तो ,
पता चले हर बात की,
रंग बदलते फितरत सारे,
पता चले ना दिन रात की.
"रजनी नैय्यर मल्होत्रा "
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 19.9.10 5 comments
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