पाश्चात्य के पीछे अपनी संस्कृति भुनाने में.
स्कूल कालेज बंद आज, पर भीड़ लगी उद्यानों में,
लगे क़तार में खरीदारी को फूलों के दुकानों में.
१४ फरवरी वेलेंटाइंस डे’ प्रेम दिवस,
क्या कहें युवाओं, इसे सर दर्द या प्रेम रस.???
"रजनी नैय्यर मल्होत्रा "
डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर ( लारा ) झारखण्ड बोकारो थर्मल से । शिक्षा -इतिहास (प्रतिष्ठा)बी.ए. , संगणक विज्ञान बी.सी .ए. , हिंदी से बी.एड , हिंदी ,इतिहास में स्नातकोत्तर | हिंदी में पी.एच. डी. | | राष्ट्रीय मंचों पर काव्य पाठ | प्रथम काव्यकृति ----"स्वप्न मरते नहीं ग़ज़ल संग्रह " चाँदनी रात “ संकलन "काव्य संग्रह " ह्रदय तारों का स्पन्दन , पगडंडियाँ " व् मृगतृष्णा " में ग़ज़लें | हिंदी- उर्दू पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित । कई राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित ।
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Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 25.1.11 12 comments
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चंचलता की मै मूरत हूँ,
लोग कहते हैं , मै खूबसूरत हूँ.
बोलो कौन हूँ मै ?
ख़ुशी हूँ मै.
जिसके ज़िन्दगी में ,
वो तो मालामाल है,
जिसके ज़िन्दगी से बाहर,
वो तो कंगाल है.
हर कोई चाहता है,
मेरा ज़िन्दगी में साथ.
तीखी जीवन में मैं मिठास हूँ,
सूखे अधरों की मै प्यास हूँ.
आसां नहीं,
हर ज़िन्दगी में मेरा आना,
क्योंकि,
ख़ुशी चीज़ ही है ,
मुश्किल से मिल पाना.
हर कोई जीवन में ,
मेरी तमन्ना रखता है,
भर जाये सागर जीवन में,
ऐसी चाहत रखता है.
कोई तो मुझे पाकर,
सागर सा ज़िन्दगी जीता है,
जहाँ मै नही,
वो बूंद बूंद को रोता है,
मुझसे ही पूरी है ,
जीवन की कहानी,
बस जाऊं मै जहाँ,
ना आये आँखों में ,
गम की पानी.
हर आँख की चाहत है ,
बस मेरे आंसू भरना.
चंचलता की मै मूरत हूँ,
लोग कहते हैं , मै खूबसूरत हूँ.
बोलो कौन हूँ मै ?
ख़ुशी हूँ मै.
" रजनी नैय्यर मल्होत्रा "
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 17.1.11 13 comments
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कुछ शाजिसों से होती शर्मशार ज़िन्दगी है,
कदम कदम पर बेबसी का शिकार ज़िन्दगी है.
साथ मिला कदम से कदम ,जिनके हम चलते रहे,
वो ही छूपा कर खंजर, हमें बन रहनुमा छलते रहे.
एक चेहरे पर कितने ही चेहरे बदले आज इन्सान ने,
हैवान है या आदमी शक्ल आये ना पहचान में.
बने फिरते हैं योद्धा तो आयें सामने मैदान में,
छूप कर वार करना आदत कायर इन्सान में.
आज हम पर दागी हैं अंगुलियाँ , तो शेर ना बन जायेंगे,
खुद की ही निगाहों में गिर, वो शर्म से मर जायेंगे.
किस हद तक आज गिर रहा इस दौड़ में जमाना है ,
सच्चाई दम तोड़ने लगी हर कोई झूठ का दीवाना है.
" रजनी नैय्यर मल्होत्रा "
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 6.1.11 5 comments
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Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 26.12.10 9 comments
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रहकर जिगर में कर देते हैं चाक चाक,
जिनपर जिगर ये निसार होता है.
वो छोड़ जाता है हर हाल में साथ,
जो सीरत से ही फरेबी फनकार होता है.
"रजनी नैय्यर मल्होत्रा "
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 14.12.10 9 comments
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Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 18.11.10 9 comments
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"एक जन्म भी नहीं निभा पाते लोग वफादारी के साथ,
यूँ ही सात जन्मों के बंधन का सौदा कर लेते हैं.
राहें जुदा सही ,मंजिल साथ मिले ना मिले ,
ज़िन्दगी के सफ़र के सिलसिले तय कर लेते हैं ."
"रजनी मल्होत्रा नैय्यर "
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 29.10.10 12 comments
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