शनिवार, जून 26, 2010

वो, खुद को , पर्दानशी कहते रहे



" उठ गया चिलमन ,
उनके,
हर हसीन राज़ से,
फिर भी ,
वो,
खुद को ,
पर्दानशी कहते रहे."

"रजनी "

शुक्रवार, जून 25, 2010

जो टूट कर भी, मुझे, जोड़ता गया

"कुछ इस तरह से,
टूटा,
वो आसमां से,
तारा,
जो टूट कर भी,
मुझे,
जोड़ता गया."

जितनी भी,
निराशा  की
डोर ,
बंधी थी
मेरे,
मन में,

उस,
डोर  की
कड़ी,
को  वो,
तोड़ता गया.

गुरुवार, जून 24, 2010

बेबस रहा संगीत मेरा

" बेबस रहा  संगीत मेरा,
संवरने  को ,
हम बंधे खड़े  रहे ,
रीतों से ,
अब वो साज़ ,
नज़र नहीं आता ,
जो बन जाते  थे,
  धुन मेरे गीतों के.."

"रजनी "

बुधवार, जून 23, 2010

इतिफाक से ही , सामना तो, हो ही जाता है, मुश्किलों से,

इतिफाक से ही ,
पर,
सामना तो,
हो ही जाता है,
मुश्किलों से,
सबका.
हम उसे,
स्वीकार करें,
या ना करें,
पर,
नियति अपने,
तय समय पर,
हर कार्य को करती है .

मंगलवार, जून 22, 2010

बस एक इरादा ही, काफी है, फैसले, बदलने ले लिए,

उस ज़िन्दगी को,
 क्या कहें ?
जो भरी ना हो,
चुनौती से ,
बस एक इरादा ही,
काफी है,
फैसले,
बदलने ले लिए,
हर पल जो,
तैयार हो,
मुश्किलों  में भी,
चलने के लिए.

मंगलवार, जून 01, 2010

टूट कर भी मेरा वजूद, बिखर नहीं पायेगा

जिस पर टिका है ,
अस्तित्व मेरा ,
वो बुनियाद ,
तुम्हारा कांधा है,
जानती हूँ ,
टूट कर भी मेरा वजूद,
बिखर नहीं पायेगा ,
क्योंकि ,
इसे ,
तुम्हारे संबल ने,
मजबूती से बांधा है .

बुधवार, मई 26, 2010

शब भर जलकर भी, मेरा सवेरा नहीं



"सबने जलाया ,
शब भर मुझे ,
सम्स के आते ही,
बुझा दिया.
क्यों मांगते हो,
मुझसे,
जो मेरा नहीं,
शब भर जलकर भी,
मेरा सवेरा नहीं ."

"रजनी "

सोमवार, मई 24, 2010

ये बंदिशें भी कैसी हैं

"ये बंदिशें भी कैसी हैं ,
कभी जुड़तीं हैं,
रस्मों के नाम से,
तो  कभी ,
बगावत से टूट जाती हैं,
ये  एक  ऐसी माला  है,
जिसके मनके की डोरी ,
खुद ,
गुन्धनेवाले  के हाथों ,
टूट  जाती है."

मंगलवार, मई 18, 2010

पत्थर समझता रहा

पत्थर समझता रहा मुझे,
आजतक शायद ,
तभी तो,
मेरे टूटने पर,
छू कर देखता रहा.

सोमवार, मई 10, 2010

फिर कैसे हँसकर, मिलन हो तुझसे

"ज़िन्दगी ,
तुझे,
मेरी खुशियाँ रास नहीं,
और,
मुझे समझौता ,
बता,
फिर कैसे हँसकर,
मिलन हो तुझसे "

Rajni Nayyar Malhotra.