शनिवार, जून 26, 2010
वो, खुद को , पर्दानशी कहते रहे
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 26.6.10 5 comments
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शुक्रवार, जून 25, 2010
जो टूट कर भी, मुझे, जोड़ता गया
"कुछ इस तरह से,
टूटा,
वो आसमां से,
तारा,
जो टूट कर भी,
मुझे,
जोड़ता गया."
जितनी भी,
निराशा की
डोर ,
बंधी थी
मेरे,
मन में,
उस,
डोर की
कड़ी,
को वो,
तोड़ता गया.
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 25.6.10 3 comments
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गुरुवार, जून 24, 2010
बेबस रहा संगीत मेरा
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 24.6.10 2 comments
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बुधवार, जून 23, 2010
इतिफाक से ही , सामना तो, हो ही जाता है, मुश्किलों से,
इतिफाक से ही ,
पर,
सामना तो,
हो ही जाता है,
मुश्किलों से,
सबका.
हम उसे,
स्वीकार करें,
या ना करें,
पर,
नियति अपने,
तय समय पर,
हर कार्य को करती है .
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 23.6.10 2 comments
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मंगलवार, जून 22, 2010
बस एक इरादा ही, काफी है, फैसले, बदलने ले लिए,
उस ज़िन्दगी को,
क्या कहें ?
जो भरी ना हो,
चुनौती से ,
बस एक इरादा ही,
काफी है,
फैसले,
बदलने ले लिए,
हर पल जो,
तैयार हो,
मुश्किलों में भी,
चलने के लिए.
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 22.6.10 6 comments
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मंगलवार, जून 01, 2010
टूट कर भी मेरा वजूद, बिखर नहीं पायेगा
जिस पर टिका है ,
अस्तित्व मेरा ,
वो बुनियाद ,
तुम्हारा कांधा है,
जानती हूँ ,
टूट कर भी मेरा वजूद,
बिखर नहीं पायेगा ,
क्योंकि ,
इसे ,
तुम्हारे संबल ने,
मजबूती से बांधा है .
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 1.6.10 5 comments
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बुधवार, मई 26, 2010
शब भर जलकर भी, मेरा सवेरा नहीं
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 26.5.10 4 comments
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सोमवार, मई 24, 2010
ये बंदिशें भी कैसी हैं
"ये बंदिशें भी कैसी हैं ,
कभी जुड़तीं हैं,
रस्मों के नाम से,
तो कभी ,
बगावत से टूट जाती हैं,
ये एक ऐसी माला है,
जिसके मनके की डोरी ,
खुद ,
गुन्धनेवाले के हाथों ,
टूट जाती है."
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 24.5.10 11 comments
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मंगलवार, मई 18, 2010
पत्थर समझता रहा
पत्थर समझता रहा मुझे,
आजतक शायद ,
तभी तो,
मेरे टूटने पर,
छू कर देखता रहा.
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 18.5.10 10 comments
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सोमवार, मई 10, 2010
फिर कैसे हँसकर, मिलन हो तुझसे
"ज़िन्दगी ,
तुझे,
मेरी खुशियाँ रास नहीं,
और,
मुझे समझौता ,
बता,
फिर कैसे हँसकर,
मिलन हो तुझसे "
Rajni Nayyar Malhotra.
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 10.5.10 13 comments
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