इतिफाक से ही ,
पर,
सामना तो,
हो ही जाता है,
मुश्किलों से,
सबका.
हम उसे,
स्वीकार करें,
या ना करें,
पर,
नियति अपने,
तय समय पर,
हर कार्य को करती है .
बुधवार, जून 23, 2010
इतिफाक से ही , सामना तो, हो ही जाता है, मुश्किलों से,
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 23.6.10 2 comments
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मंगलवार, जून 22, 2010
बस एक इरादा ही, काफी है, फैसले, बदलने ले लिए,
उस ज़िन्दगी को,
क्या कहें ?
जो भरी ना हो,
चुनौती से ,
बस एक इरादा ही,
काफी है,
फैसले,
बदलने ले लिए,
हर पल जो,
तैयार हो,
मुश्किलों में भी,
चलने के लिए.
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 22.6.10 6 comments
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मंगलवार, जून 01, 2010
टूट कर भी मेरा वजूद, बिखर नहीं पायेगा
जिस पर टिका है ,
अस्तित्व मेरा ,
वो बुनियाद ,
तुम्हारा कांधा है,
जानती हूँ ,
टूट कर भी मेरा वजूद,
बिखर नहीं पायेगा ,
क्योंकि ,
इसे ,
तुम्हारे संबल ने,
मजबूती से बांधा है .
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 1.6.10 5 comments
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बुधवार, मई 26, 2010
शब भर जलकर भी, मेरा सवेरा नहीं
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 26.5.10 4 comments
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सोमवार, मई 24, 2010
ये बंदिशें भी कैसी हैं
"ये बंदिशें भी कैसी हैं ,
कभी जुड़तीं हैं,
रस्मों के नाम से,
तो कभी ,
बगावत से टूट जाती हैं,
ये एक ऐसी माला है,
जिसके मनके की डोरी ,
खुद ,
गुन्धनेवाले के हाथों ,
टूट जाती है."
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 24.5.10 11 comments
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मंगलवार, मई 18, 2010
पत्थर समझता रहा
पत्थर समझता रहा मुझे,
आजतक शायद ,
तभी तो,
मेरे टूटने पर,
छू कर देखता रहा.
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 18.5.10 10 comments
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सोमवार, मई 10, 2010
फिर कैसे हँसकर, मिलन हो तुझसे
"ज़िन्दगी ,
तुझे,
मेरी खुशियाँ रास नहीं,
और,
मुझे समझौता ,
बता,
फिर कैसे हँसकर,
मिलन हो तुझसे "
Rajni Nayyar Malhotra.
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 10.5.10 13 comments
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शुक्रवार, मई 07, 2010
माँ का आँचल,
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 7.5.10 8 comments
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मैंने तो लकीरों पर भरोसा करना छोड़ दिया
"क्यों ,
उसे ही पाना चाहता है मन ,
जो किस्मत की
लकीर में नहीं होता,
मैंने तो लकीरों पर,
भरोसा करना छोड़ दिया ."
" रजनी "
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 7.5.10 8 comments
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गुरुवार, मई 06, 2010
हम जहाँ खड़े थे वहीं खड़े रह जाते हैं,
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 6.5.10 9 comments


