अपने बच्चों को अंग्
दूसरे भाषा का जानकर होना अच्छी बात है ,पर उसके पीछे अपनी ही भाषा को नज़रंदाज़ करना ये तो वही बात हुई..........
दूसरे की माँ अपनी माँ से ज्यादा खुबसूरत हो तो क्या उसके पीछे अपनी माँ को छोड़ देंगे ?
सिर्फ़ हर वर्ष हिंदी दिवस मना लेने से क्या होगा ? जबतक इसपर सबकी सहमती की पुष्टि नहीं हो जाती कि हिंदी को ही सभी सरकारी, गैर सरकारी स्थान पर पहला स्थान मिलना चाहिए अन्य भाषा को बाद में |
हिंदी हमारी शान रही है, हिंदुस्तान की पहचान रही है ....आज 14 सितम्बर के ही दिन संविधान ने हिंदी को राजभाषा बनाने की मान्यता दी थी | हिंदी राजभाषा ,राष्ट्र भाषा , जन -जन की भाषा
बन कर अपनी उसी सम्मान को पा ले |




