"एक जन्म भी नहीं निभा पाते लोग वफादारी के साथ,
यूँ ही सात जन्मों के बंधन का सौदा कर लेते हैं.
राहें जुदा सही ,मंजिल साथ मिले ना मिले ,
ज़िन्दगी के सफ़र के सिलसिले तय कर लेते हैं ."
"रजनी मल्होत्रा नैय्यर "
शुक्रवार, अक्टूबर 29, 2010
ज़िन्दगी के सफ़र के सिलसिले तय कर लेते हैं
Posted by डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) at 29.10.10 12 comments
Labels: Poems
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