शुक्रवार, जुलाई 20, 2012

 मैं   बहुत   परेशान हूँ  अपने  देश   के   हालत   पर,
 कोई लड़ रहा भाई- भतीजा कोई      जातिवाद  पर |

सरहद  पर   खून शहीदों का  जैसे  वारि की  धारी  है ,
हर दिन नए  घोटालों में  सनी    सियासत    सारी   है |


 जज़्बे पर हालात कभी,  हालात पर जज्बा भारी है ,
 हो जाओ तैयार नस्ल-ए-नव अब तुम्हारी  बारी है |

 "रजनी नैय्यर मल्होत्रा"

6 comments:

dheerendra ने कहा…

बेहतरीन लाजबाब प्रस्तुति,,,,
बहुत सुंदर रचना,,,,,,रजनी जी
RECENT POST ...: आई देश में आंधियाँ....

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति!
इस प्रविष्टी की चर्चा आज रविवार के  चर्चा मंच  पर भी होगी!
सूचनार्थ!

सुशील ने कहा…

बहुत सुंदर
परेशान बहुत से लोग हैं
इसीलिये लिख जाते हैं
परेशान इंसान उस को
पढ़ भी जाते हैं
अच्छा लिखा है बहुत
कह कर भी जाते हैं
थोड़े से इससे भी तो
कभी परेशान हो जाते हैं
चुपचाप मुँह बना ले जाते हैं !

Rajesh Kumari ने कहा…

bahut sundar rajni ji vaah meri pahli tippani shayad spam me gai

संगीता पुरी ने कहा…

हो जाओं तैयार नस्‍ले नव तुम्‍हारी बारी है ..

सही है !!

रजनी मल्होत्रा नैय्यर ने कहा…

mera hardik aabhar ...........aap sabhi ko apna kimti samay diya ..

Dhirendra ji.......

shastri sir ji.......
shushil sir ....
rajesh mam......
sangeeta ji.......