शुक्रवार, फ़रवरी 24, 2012

जैसे कोई ख़्वाब से हिलाकर जगा दिया हो

दिन इधर जो  बीते कुछ इस तरह से  मेरे
जैसे कोई ख़्वाब से हिलाकर जगा दिया हो

दे  कर   सामने    मुरादों  से   भरी  थाली
लेने   की सूरत  में  फ़ौरन  हटा   दिया हो

हसरतें  देकर"रजनी" उमंगों से  जीने  की
आख़िरी ख्वाहिश    में कज़ा दे   दिया   हो


9 comments:

dheerendra ने कहा…

बहुत,बेहतरीन लिखा है ...रजनी जी ,सुंदर सटीक रचना के लिए बधाई,.....

MY NEW POST...आज के नेता...

sangita ने कहा…

सुंदर सटीक रचना के लिए बधाई,.....

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति!
इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

रजनी मल्होत्रा नैय्यर ने कहा…

Dhirendra ji,,
Sangeeta ji......

shashtri sir.........aap sabhi ko mera hardik naman .....

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

बेहतरीन .

सादर

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

बहुत खूब... वाह!
सादर.

veerubhai ने कहा…

सुन्दर है यह सौगात 'रजनी' की .

दिगम्बर नासवा ने कहा…

बहुत खूब ... सभी शेर कमाल के हैं .. लाजवाब ..

रजनी मल्होत्रा नैय्यर ने कहा…

mera hardik aabhar .......