बुधवार, मई 26, 2010

शब भर जलकर भी, मेरा सवेरा नहीं



"सबने जलाया ,
शब भर मुझे ,
सम्स के आते ही,
बुझा दिया.
क्यों मांगते हो,
मुझसे,
जो मेरा नहीं,
शब भर जलकर भी,
मेरा सवेरा नहीं ."

"रजनी "

4 comments:

रजनी मल्होत्रा नैय्यर ने कहा…

tipaani ki jo presani thi wo ab khatm ho gayi hai .

रजनी मल्होत्रा नैय्यर ने कहा…

aap sab apne tippani post kar sakte hain jo prob. thi tippani ke prakashan me wo ab thik ho gayi.

मुकेश कुमार सिन्हा ने कहा…

haan.................bahut khub...:)
aapke likhi panktiyan aapki tarah sundar..........hai na!

amrendra "amar" ने कहा…

very nice line rajni ji .......................