गुरुवार, जनवरी 19, 2012

बहुत रंग हैं जीवन के, जिसमे ग़म का रंग गहरा है


बहुत रंग हैं जीवन के, जिसमे ग़म  का  रंग गहरा है
खुशियों के    सांचों   पर तो,    ग़मों का  ही   पहरा  है

ये    मदमस्त   समीर      तू    छेड़    कोई  तराना
जिसमे   न  बचे   दुहराने को       कोई   अफ़साना

तेरे   संग   हम   भी चलो   वहां  तक    चल   जायें
कोई   भी    ग़म मुझे  जहाँ   का    न रुलाये   सताये

ख़ुद  ही   हमने   ख़ुद  को   इतने   ज़ख्म     लगाये
अब  तो  असह्य है ये  पीड़ा जो अब  सही  न   जाये

न   जाने  ये कैसी  पीड़ा   है जो   कभी   दब जाती है
 कभी-  कभी  मन  के अग्न  को  और    बढ़ाती    है

क्यों खुशियों   के साथ    ग़मों का   भी   समावेश  है ?
क्यों हर   ज़िंदगी में   कुछ- कुछ इसका   भी प्रवेश है ?

बहुत   रंग हैं जीवन   के जिसमे   ग़म का रंग गहरा है,
खुशियों   के     सांचों  पर   तो  ग़मों   का   ही  पहरा है


किसकी अब बात हो, करे  किस पर    यकीं   ज़माना,
अपने   बेगाने  सभी    दे देते हैं ग़म    का     नज़राना

ये ग़म    हर   ज़ख्म   पर    मरहम         लगाता     है
 कुछ पल करता  चोट उसी   से     जीना  सिखाता   है


बहुत    रंग  हैं जीवन   के,  जिसमे   ग़म का रंग गहरा है
ख़ुशियों    के  सांचे    पर    तो   ग़मों  का    ही  पहरा   है

ग़म  से भागते हैं    इससे        ही     जीवन   रुपहला   है
बहुत    रंग हैं   जीवन के   जिसमे गम का रंग गहरा   है 

17 comments:

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

बहुत सुन्दर

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत बढ़िया प्रस्तुति!
--
घूम-घूमकर देखिए, अपना चर्चा मंच
लिंक आपका है यहाँ, कोई नहीं प्रपंच।।

Amrita Tanmay ने कहा…

बहुत ही बढ़िया..

Rakesh Kumar ने कहा…

खूबसूरत हृदयस्पर्शी प्रस्तुति है आपकी.
गम के गहरे रंग को अभिव्यक्त करती.

प्रस्तुति के लिए आभार आपका.

मेरे ब्लॉग पर आईयेगा,रजनी जी,
नवीन पोस्ट आज ही जारी की है.
आपके आने से मेरा उत्साहवर्धन होता है.

ऋता शेखर मधु ने कहा…

बहुत ही सुंदर प्रस्तुति...

Atul Shrivastava ने कहा…

सुंदर रचना।

संजय भास्कर ने कहा…

कितनी प्रोत्साहन देती पंक्तियाँ है...... बहुत बढिया रचना

रजनी मल्होत्रा नैय्यर ने कहा…

aap sabhi ko hardik naman aap sabhi ki tippniyan mere hausle ko aur badhate hain..........

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल बृहस्पतिवार 02-02 -20 12 को यहाँ भी है

...नयी पुरानी हलचल में आज...गम भुलाने के बहाने कुछ न कुछ पीते हैं सब .

अनुपमा त्रिपाठी... ने कहा…

wah ...bahut sunder rachna ....

Asha Saxena ने कहा…

मन को छूती भावपूर्ण रचना |
आशा

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

बेहतरीन रचना।


सादर
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जो मेरा मन कहे पर आपका स्वागत है

रजनी मल्होत्रा नैय्यर ने कहा…

Sangeeta didi.......
Asha ji.......
Anupma ji........
Atul ji.....
Yashvant mathur ji.........
aap sabhi ko mera hardik aabhar......

Reena Maurya ने कहा…

खुशियों पर तो गम का पहरा है
बहुत ही सुन्दर ,बेहतरीन रचना है

Sadhana Vaid ने कहा…

बेहतरीन भावों से सजी बेहतरीन प्रस्तुति ! मन को मोहने वाली अनुपम रचना ! बधाई स्वीकार करें !

सदा ने कहा…

अनुपम भाव संयोजन ...बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

रजनी मल्होत्रा नैय्यर ने कहा…

Shadhna ji......taledil se sukriya.....
Reena ji .......hardik aabhar..
Sada ji aapko bhi mera hardik sukriya.......