शनिवार, जून 26, 2010

वो, खुद को , पर्दानशी कहते रहे



" उठ गया चिलमन ,
उनके,
हर हसीन राज़ से,
फिर भी ,
वो,
खुद को ,
पर्दानशी कहते रहे."

"रजनी "

5 comments:

sandeep gautam ने कहा…

very nice rajni ji

संजय भास्कर ने कहा…

उफ्फ... फ... फ..सच बेहद प्रभावशाली अपनापन लाजवाब

Subodh Kumar ने कहा…

bahut umdaa hai

हमसफ़र رافي ने कहा…

Wah Rajani ji...........lajawab likha hai apne ....
1.जिस आसमां ने मुझको चमकना सिखाया , आज खुद से वो ,मेरा दामन छुड़ा गए
2.सागर में रहकर भी, प्यासे रह गये
3.वो, खुद को , पर्दानशी कहते रहे

bahoot khub........please scrap me on orkut ..


Ravi humsafar

Subodh Kumar ने कहा…

kya main is rachnaa ko 1 vyangya k rup me dekhun..agar haan to ye rachnaa taarif k kaaabil hai