मंगलवार, अप्रैल 06, 2010

और फूल मुरझा गए



हर बाग़ को तेरे जैसा बागवान मिले,
हर बाग़ में खिज़ा में भी बहार खिले.

आये थे जब तुम खिज़ा में भी बहार थी,
छोड़ गए बाग उजड़ गया , हो गया  वीरान.

अब तो बहार में भी ये लगता है  वीरान,
हर सुबह इसकी हो गयी अब  काली शाम.

हर बहार में कलियाँ तुझे याद करती हैं,
आये वही बागवान  फिरसे,  फरियाद करती है.

कलियों पर तब  छाया तेरा सुरूर था,
उन्हें अपनी महक पर तेरा गुरुर   था.

अब ना रही वो कलियाँ,ना रहा वो गुरुर,
जब से गया बाग़  का बागवान दूर.

गाते भँवरे   जब कलियों पर मंडराते थे,
कलियों के मन तब खुद पर इठलाते थे

तुम क्या गए खिल पाई ना कलियाँ,
गुमसुम  सी हो गयी इनकी दुनिया.

और फूल मुरझा गए.तुम क्या गए,
खिली ना कलियाँ,और फूल मुरझा गए.

हर बाग़ को तेरे जैसा बागवान मिले,
हर बाग़ में खिज़ा में भी बहार खिले.

तुम क्या गए खिल पाई ना कलियाँ.
और फूल मुरझा गए.

"रजनी"

19 comments:

Unknown ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुती।

डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) ने कहा…

sukriya bahut 2 dhiraj ji.......

सीमा सचदेव ने कहा…

sundar bhaav , kalaa paksh me gadbad

Shekhar Kumawat ने कहा…

waqy me assa laga jese kisi fulo ke bag me aa gya hu

ek bat or aap ka photo bahut sundar he

or jab mene aap ka blog khola dar gaya kyun ki aap ka photo bahut bada dikh raha tha scrin par bad me chota kiya to pata chala aap kitne sundr he

waqay me bahut sundar photo he


shekhar kumawat

http://kavyawani.blogspot.com/

डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) ने कहा…

seema ji sukriya bhasha me kuchh kami hai mujhe bhi pratit hua........

रश्मि प्रभा... ने कहा…

har baag mein tere jaisa baagbaan .... bahar ruk jayegi dil thaam ke.......waah

डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) ने कहा…

rashmi mam apna sneh dekar yun hi hausla badhte rahen.........naman

Subodh Kumar ने कहा…

bahut achaa hai .... 1 pal k lie to lagaa ki shayad is kavita ko maine kahin mahsus kia hai... ati sunder rachnaa hai......keep it up rajniji....dard aur kasak ka sunder varnan hai shabdon k madhyam se.........

रचना प्रवेश ने कहा…

bhavnasheel rachana,shabd bol rahe hai aapke bhavo ke bol......badhai

डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) ने कहा…

subodh ji hardik sukriya .........

डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) ने कहा…

pravsh di ....sahi kaha bhavo ko hi vaykt kiya hai sabdo ke madhyam se.......subodh ji ne bhi sahi kaha dard aur kashak ka mishran hai ye rachna...

अरुणेश मिश्र ने कहा…

प्रशंसनीय ।

डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) ने कहा…

sukriya sir ji.......aap aaye achha laga.......

bhootnath ने कहा…

मैं अपनी बात पर कायम हूँ....रजनी....थोडा ज्यादा सोचना होगा.....तब ज्यादा "कुछ" बात आ पाएगी.....!!बुरा मत मानना...

स्वप्निल तिवारी ने कहा…

badhiya hai ..par aur behtar ho sakta hai ye sab .... :)

डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) ने कहा…

margdarshan ka sukriya ...koshish rahegi aur achha karne ki..........aatish ji aap aaye achha laga.......

amrendra "amar" ने कहा…

Rajni ji bahut Sunder rachna ..............

अनाम ने कहा…

सुंदर रचना........


http://rajdarbaar.blogspot.com

डॉ रजनी मल्होत्रा नैय्यर (लारा) ने कहा…

sukriya raj ji