शनिवार, सितंबर 10, 2011

हर तरफ अब तो आतंकी शोर है

हर तरफ अब तो आतंकी शोर है,
निशाने पर दिल्ली, मुम्बई, कभी बंगलोर है.

काला चश्मा, तेल कान में डाले सरकारे आला बैठिये,
जब हो जाएँ हादसे कहते हैं कैसे आ गए घुसपैठिये.

भोली जनता होती  रही  आतंकी शिकार है ,
बिन चाभी के ताला सा लोकतंत्र बेकार है.

राह चलना मुश्किल अब तो हथेलियों में जान है,
अंधी बहरी व्यवस्था पर जनता कुर्बान है.

समय समय ये खून खराबा बदला हुआ परिवेश है
हो जाओ खुद ही तैयार  खतरे में  देश है .



29 comments:

Kunwar Kusumesh ने कहा…

सामयिक और सटीक रचना है.

संजय भास्कर ने कहा…

क्या ग़जब की रचना...बिल्कुल आज के परिवेश को पानी पिलाती...बधाई और आभार

Kailash C Sharma ने कहा…

आज के परिवेश को उकेरती बहुत सटीक प्रस्तुति..

प्रेम सरोवर ने कहा…

सत्य को ऊजागर करती आपकी अभिव्यक्ति मन के संवेदनशील तारों को झंकृत कर गयी । आपके पोस्ट पर पहली बार आया हूँ । मेरे पोस्ट पर आपका निमंत्रण है । धन्यवाद ।

मनोज कुमार ने कहा…

बहुत सही कहा आपने, हो जाओ खुद तैयार खतरे में देश है। इन सब के लिए अब हमें ही तैयार होना पड़ेगा।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है!
यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

वन्दना ने कहा…

सामयिक और सटीक रचना

ईं.प्रदीप कुमार साहनी ने कहा…

बहुत सार्थक रचना | मेरे ब्लॉग में भी आयें |
मेरी कवितारे ब्लॉग में भी आयें |
मेरी कविता

ईं.प्रदीप कुमार साहनी ने कहा…

बहुत सार्थक रचना | मेरे ब्लॉग में भी आयें |
मेरी कवितारे ब्लॉग में भी आयें |
मेरी कविता

रजनी मल्होत्रा नैय्यर ने कहा…

आप सभी सुधि जनों को यहाँ तक आने के लिए मेरा आभार, ऐसी घटनाएँ जो घट रही उनसे सम्बंधित रचनाएँ सभी तक पहुंचे यही हमसभी का उदेश्य है . पर मेरे साथ एक परेशानी है जब भी बारिश होती है मेरा नेट काम ही नहीं करता जिस कारण मै शनिवार रात से कल तक वंचित रही किसी भी पोस्ट तक आने के लिए....माफ़ी चाहती हूँ

रजनी मल्होत्रा नैय्यर ने कहा…

कुशुमेश जी ,.. आभार ऐसे प्रोत्साहन बढ़ाने के लिए...

रजनी मल्होत्रा नैय्यर ने कहा…

संजय भाई आपको भी शुक्रिया ....

रजनी मल्होत्रा नैय्यर ने कहा…

कैलाश जी बहुत बहुत आभार आप सभी के बोल प्रेरणा तुल्य हैं....

रजनी मल्होत्रा नैय्यर ने कहा…

प्रेम जी ......आभार यूँ सराहने के लिए.......

रजनी मल्होत्रा नैय्यर ने कहा…

मनोज जी आभारी हूँ , यूँ ही प्रोत्साहन मिलता रहे .

रजनी मल्होत्रा नैय्यर ने कहा…

डॉ. शास्त्री जी आपका मागदर्शन मिलता रहे यूँ ही प्रोत्साहन से ...

रजनी मल्होत्रा नैय्यर ने कहा…

वंदना जी ....आपका आना सुखद लगा स्नेह मिलता रहे....

रजनी मल्होत्रा नैय्यर ने कहा…

प्रदीप जी आभार समय देने के लिए .......

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

सुन्दर कविता रजनी जी बधाई और शुभकामनायें

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

सुन्दर कविता रजनी जी बधाई और शुभकामनायें

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

सुन्दर कविता रजनी जी बधाई और शुभकामनायें

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

आप इतना अच्छा लिखती हैं और मेरी नज़रों से दूर रहीं अब तक! यह मेरा दुर्भाग्य था।

NEELKAMAL VAISHNAW ने कहा…

अग्रिम आपको हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं आज हमारी "मातृ भाषा" का दिन है तो आज हम संकल्प करें की हम हमेशा इसकी मान रखेंगें...
आप भी मेरे ब्लाग पर आये और मुझे अपने ब्लागर साथी बनने का मौका दे मुझे ज्वाइन करके या फालो करके आप निचे लिंक में क्लिक करके मेरे ब्लाग्स में पहुच जायेंगे जरुर आये और मेरे रचना पर अपने स्नेह जरुर दर्शाए..
MADHUR VAANI कृपया यहाँ चटका लगाये
BINDAAS_BAATEN कृपया यहाँ चटका लगाये

अभिषेक मिश्र ने कहा…

सामायिक रचना है यह आपकी. झाड़खंड से एक और ब्लॉगर से परिचित हो अच्छा लगा.

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

संवेदनशील रचना ...

दिगम्बर नासवा ने कहा…

आज के माहोल का सही सटीक चित्रण किया है आपने इस गज़ल में ... कडुवा सच है ये ..

Kunwar Kusumesh ने कहा…

हिंदी दिवस की शुभकामनायें

Human ने कहा…

जागरूकता व सामयिक चिंतन से पूर्ण एक अच्छी रचना

रजनी मल्होत्रा नैय्यर ने कहा…

bahut bahut sukriya aap sabhi ko