शनिवार, मार्च 12, 2011

कर्म भाग्य बनाता है. बेटों का भी और बेटियों का भी.

एक वक़्त था
जब मेरे जन्म पर
तुमने कहा था 
कुल्क्छिनी
आते ही
भाई को खा गयी |
 माँ तेरी  ये बात 
मेरे बाल मन
में घर कर  गयी
मेरा बाल मन रहने लगा
अपराध बोध से ग्रस्त 
पलने लगे कुछ विचार , 
क्या करूँ ऐसा ?
जिससे तेरे मन से
मिटा सकूँ मैं 
वो विचार 
 कम कर सकूँ
तुम्हारे
मन के अवसाद को |
वक़्त गुजरते गए
ज़ख्म भी भरते गए
फिर आया
एक ऐसा वक़्त
जब तुमने ही कहा
बेटियां कहाँ पीछे हैं
बेटों से
वो तो दोनों कुलों  का
मान बढाती   हैं ।
माँ 
शायद तुम्हें  भी
अहसास हो गया
क़ि जन्म नहीं
कर्म भाग्य बनाता है 
बेटों का भी,
और बेटियों का भी ।
   
 " रजनी नैय्यर मल्होत्रा "

12 comments:

Khare A ने कहा…

ek dan sahi bat!

sundar prastuti!

Aditya Tikku ने कहा…

behtareen***

सदा ने कहा…

बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

रजनी मल्होत्रा नैय्यर ने कहा…

mera hardik aabhar aap sabhi ko .....

मुकेश कुमार सिन्हा ने कहा…

pyari see rachna.......

रजनी मल्होत्रा नैय्यर ने कहा…

sukriya ............mukesh ji

सहज समाधि आश्रम ने कहा…

रजनी जी आपको अबीर गुलाल के
साथ होली की ढेरों शुभकामनायें ।
हैप्पी होली

Kunwar Kusumesh ने कहा…

हफ़्तों तक खाते रहो, गुझिया ले ले स्वाद.
मगर कभी मत भूलना,नाम भक्त प्रहलाद.

होली की हार्दिक शुभकामनायें.

रजनी मल्होत्रा नैय्यर ने कहा…

"इस होली में सदभावना के रंग मिला कर रंग देना हर गाल,
ना वैर रहे मन में किसी के,ना रहे मन को किसी से मलाल."
"रजनी नैय्यर मल्होत्रा"

Dorothy ने कहा…

नेह और अपनेपन के
इंद्रधनुषी रंगों से सजी होली
उमंग और उल्लास का गुलाल
हमारे जीवनों मे उंडेल दे.

आप को सपरिवार होली की ढेरों शुभकामनाएं.
सादर
डोरोथी.

Kunwar Kusumesh ने कहा…

आपकी ये प्रस्तुति भ्रूण हत्या रोकने में भी मददगार साबित होगी.

तरुण भारतीय ने कहा…

आपकी पोस्ट ने दिल गहराई को छु लिया .........