सोमवार, जनवरी 31, 2011

ये आईना

एक पुरुष
एक स्त्री को
भददी- भददी
गालियाँ  दे रहा था
और  निरंतर
उस स्त्री की
पिटाई कर रहा था |
कुछ लोग,
जिनमें  स्त्रियों की
संख्या   ज़्यादा    
 थी
पास से देखते
आपस में कहते रहे,
ये पति- पत्नी का
मामला है
हमें इससे क्या ?
ये  कुछ भी करें !
सभी
ये कह वहां से
खिसक गए ।
कुछ दिनों बाद
पत्नी,
पति को
अपने हाथों से
खिला रही थी
अपने घर के
 प्रांगन में ।
तभी,पड़ी
उनदोनों  पर
एक
पड़ोसन की नज़र ,
ये देख आसपास
चर्चे फ़ैल गए
कितने बेशर्म  हैं
ये लोग ,
क्या पति- पत्नी को
ऐसे रहा जाता है ?
ये  आईना है
हमारे सभ्य
समाज का
जिसमें
हम रहते हैं ।



"रजनी नैय्यर मल्होत्रा"




26 comments:

Patali-The-Village ने कहा…

सही लिखा है आप ने|यह एक विचारणीय विषय है|

Kunwar Kusumesh ने कहा…

भावनात्मक अभिव्यक्ति.

ZEAL ने कहा…

यही मानसिकता है समाज की , जहाँ किसी के दुःख-सुख से सरोकार रखना चाहिए , वहाँ से खिसक लिए। और जब किसी का सुख देखा तो ईर्ष्या से ग्रस्त हो बदनामी करने में जुट गए।

रजनी मल्होत्रा नैय्यर ने कहा…

bahut bahut aabhar aap sabhi ko ..............

divya ji bilkul sahi kaha aapne yahi mansikta hai jyadatar smaj me .......

RAJEEV KUMAR KULSHRESTHA ने कहा…

I really enjoyed reading the posts on your blog.

Shekhar Kumawat ने कहा…

SAHI MUDDA
UTHAYA AAP NE

उपेन्द्र ' उपेन ' ने कहा…

यह भी एक सच्चाई है ........ बहुत ही विचारणीय प्रस्तुति.

kumar zahid ने कहा…

तभी तो कवि प्रदीप ने लिखा था -
'दुनिया रंग रंगीली बाबा दुनिया रंग रंगीली'
...एक गधे और बाप बेटे की हिन्दी अंग्रेजी की कहानी भी हमारे सभ्य समाज के नकाब को खूब उघैड़ती है.. बहुत खूब..

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

यक़ीनन रजनी जी यह आइना हमारे तथाकथित सभ्य समाज का ही है...... बहुत अच्छी लगी आपकी रचना

रजनी मल्होत्रा नैय्यर ने कहा…

aap sabhi ke snehasish ke liye aabhari hun.... sneh milta rahe ........

mridula pradhan ने कहा…

bahut sunder.

amrendra "amar" ने कहा…

dil ki gehraiyo me uter gayi aapki ye rachna ...shukriya

Atul Shrivastava ने कहा…

कविताओं के माध्‍यम से आपने सच्‍चाई बयां कर दी। यही हमारे सभ्‍य समाज की हकीकत है। पति पत्‍नी के आपस के झगडे में कूदकर कोई भी बीच बचाव करने की कोशिश नहीं करता, सब यह कहकर किनारे हो लेते हैं कि यह उनका आपस का मामला है लेकिन जब वे अपने दाम्‍पत्‍य जीवन में मशगूल रहकर दुनिया की परवाह नहीं करते तो ऐसे ही लोग पीठ पीछे बातें करते हैं।
रजनी जी, अफसोस होता है कि ऐसे दोगले चरित्र वाले लोग बहुतायत में पाये जाते हैं।

रजनी मल्होत्रा नैय्यर ने कहा…

aap sabhi ke sneh ke liye aabhari hun ........net ki kathhinai ki vajah se aane me deri hui ...

RAJEEV KUMAR KULSHRESTHA ने कहा…

बहुत सुन्दर रजनी जी । आपका ब्लाग bolg world .com में जुङ गया है ।
कृपया देख लें । और उचित सलाह भी दें । bolg world .com तक जाने के
लिये सत्यकीखोज @ आत्मग्यान की ब्लाग लिस्ट पर जाँय । धन्यवाद ।

G.N.SHAW ने कहा…

bahut dundar....rajaniji....

sagebob ने कहा…

बहुत ही बढ़िया प्रस्तुति.

ये दुनिया दो धारी तलवार है.
एक तरफ से कुंद, एक तरफ से धार है.

आप की कलम को सलाम.

RAJEEV KUMAR KULSHRESTHA ने कहा…

अब सभी ब्लागों का लेखा जोखा BLOG WORLD.COM पर आरम्भ हो
चुका है । यदि आपका ब्लाग अभी तक नही जुङा । तो कृपया ब्लाग एड्रेस
या URL और ब्लाग का नाम कमेट में पोस्ट करें ।
http://blogworld-rajeev.blogspot.com
SEARCHOFTRUTH-RAJEEV.blogspot.com

दुधवा लाइव पत्रिका ने कहा…

सुन्दर भावों से परिपूर्ण रजनी जी बेहतरी अभिव्यक्ति है आप की शब्दों के माध्यम से...

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति ने कहा…

कमाल की बात ...अच्छा दर्पण दिखाया ... समाज कि ऐसी क्षुद्र मानसिकता पर करारी चोट... वाह...

Dorothy ने कहा…

दिल की गहराईयों को छूने वाली एक खूबसूरत, संवेदनशील और मर्मस्पर्शी प्रस्तुति. आभार.
आपको वसंत पंचमी की ढेरों शुभकामनाएं!
सादर,
डोरोथी.

रजनी मल्होत्रा नैय्यर ने कहा…

aap sabhi ke sneh ke liye hardik aabhari hun.......... mere yaha net ki prob. kuchh dino se banhi hui hai jiske karan aap sabhi tak nahi pahuch payi khed hai .........fir se aabahr is sneh ke liye

ज्ञानचंद मर्मज्ञ ने कहा…

रजनी जी,

दुनियाँ की सही तस्वीर आपने प्रस्तुत किया है !
लोग ऐसे ही हैं !

: केवल राम : ने कहा…

आदरणीय रजनी मल्होत्रा जी
मेरे ब्लॉग पर आकर एक सार्थक टिप्पणी के लिए आपका आभार ...आशा है आपका मार्गदर्शन यूँ ही मिलता रहेगा ...आपका आभार

OM KASHYAP ने कहा…

bahut sunder

डॉ० डंडा लखनवी ने कहा…

इस जानदार और शानदार प्रस्तुति हेतु आभार।
=====================
कृपया पर्यावरण संबंधी इन दोहों का रसास्वादन कीजिए।
==============================
गाँव-गाँव घर-घ्रर मिलें, दो ही प्रमुख हकीम।
आँगन मिस तुलसी मिलें, बाहर मिस्टर नीम॥
-------+------+---------+--------+--------+-----
शहरीपन ज्यों-ज्यों बढ़ा, हुआ वनों का अंत।
गमलों में बैठा मिला, सिकुड़ा हुआ बसंत॥
सद्भावी-डॉ० डंडा लखनवी