मंगलवार, मार्च 02, 2010

रफ्ता- रफ्ता ख़ुदकुशी का,मज़ा हमसे पूछिये

जो हर साँस में बस जाये,धड़कन बन कर .

उसे याद करने की,वजह हमसे पूछिये.

रफ्ता- रफ्ता ख़ुदकुशी का,मज़ा हमसे पूछिये,

गुनाह के बगैर कैसे मिले,सजा हमसे पूछिये.

नींद खोकर चैन लूटने की,वजह हमसे पूछिये,

कातिल को दे दी रिहाई,उम्र कैद की सजा खुद को.

ये लूटने की खुबसूरत,अदा हमसे पूछिये.

एक बार में पी जाते हैं जाम लोग,

घूट घूट कर पीने का मज़ा हमसे पूछिये.

दोस्ती भी प्यार से नहीं निभ पाते हैं,

दुश्मनों को भी निभाने की अदा हमसे पूछिये.

कातिल को दे दी रिहाई,उम्र कैद की सजा खुद को.

ये लूटने की खुबसूरत,अदा हमसे पूछिये.

"रजनी नैय्यर मल्होत्रा "

7 comments:

हमसफ़र رافي ने कहा…

ultimate Rajani ji

Rajni Nayyar Malhotra ने कहा…

sukriya aapka

Uski Batein ने कहा…

rajni ji
blog par ghazalsangrh padh kar
rafta rafta ...... rachna padhi
par aapne ye rachn akis vidha me likhi hai?
ghaal ka mijaz isme nahi mila
aur atukant kavita bhi nahi hai ye

nayyar ने कहा…

bahut achha hai rajni ,par aur sudhar karo . shubhkamnayen meri tumhe.......

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

lootne ki khubshurat ada hamse puchhiye......:)

badi pyari rachnakaar ho aap!!

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

lekin aapko hamare blog pe aane ka time nahi mil pata, so sad:D

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

lekin aapko hamare blog pe aane ka time nahi mil pata, so sad:D