बुधवार, दिसंबर 09, 2009

सिवा तेरे दिल ने मेरे दूसरे को अपनाया नहीं|

जामे इश्क तुने ,
कभी पिलाया नहीं,
किसी पैमाने और को,
हमने उठाया नहीं,
यूँ तो मिले थे ,
तुमसे भी बढ़कर
कई और,
सिवा तेरे,
दिल ने मेरे,
दूसरे को अपनाया नहीं.

"rjni"

5 comments:

amrendra "aks" ने कहा…

"यूँ तो मिले थे तुमसे भी बढ़कर कई और,
सिवा तेरे दिल ने मेरे दूसरे को अपनाया नहीं"


bahut accha mam...........shayed hamare man ki halat kuch aisih hoti hai .............thanx

Rajni Nayyar Malhotra ने कहा…

sukriya amrendra ji man ke bhav hain .............bas kaagaz me pirone ke baad bahuto ke man ko chhu jate hain........

Prasoon ने कहा…

अब हम आपकी इस कृति के लिए तो अकथनीय से महसूस कर रहे हैं, किन्तु बस इतना ही कहना चाहूंगा कि -

अँधेरे सब उसकी चाहत के, मुझको रवि बना बैठे !

अश्रुओं से भरे नयनों की, मुझको छवि बना बैठे !!

खुदा भी चाहता तो, कर न सकता था बयाँ यारों,

तभी तो गम उसकी नफरत के, मुझको 'कवि' बना बैठे !!

आपका - प्रसून दीक्षित 'अंकुर'

Rajni Nayyar Malhotra ने कहा…

प्रसून दीक्षित 'अंकुर'ji bahut khub aapne bhi likha hai.....sukriya meri rachna ko sarahne ke liye.............

LOG HAATH BHI NA MILAYENGE,JO GALE MILOGE TAPAK SE ने कहा…

i think it should be -- siva tujhe dil ne mere dusre ko apnaya nahi hona chahiye