मंगलवार, दिसंबर 29, 2009

आज मिलते ही मुंह अपना मोड़ लिया

वो हवाएं भी अब नहीं लाती,
पैगाम आपका,
जो आती थी मेरे घर तक,
लगता है आपने रुख इधर का छोड़ दिया|

हर साँस पर आती थी हिचकियाँ,
अब तो जमाने गुजर गए इन्हें आये,
लगता है आपने मुझे याद करना छोड़ दिया|

आजादी के साथ घूम रहे थे,
मेरे अरमानों के बाराती,
आपके हाथ में पत्थर,
मेरा शीशे का मकान तोड़ दिया|

कहते थे कभी भी न छोड़ेंगे साथ,
और अब तो ख्वाबों में भी आना छोड़ दिया|

पानी से डरनेवाले,
सागर में उतर गए,
आपके हाथों का ले सहारा,
डूबने लगे तो,
हाथ आपने छोड़ दिया|

धुनी रमा कर जोगी सा,
मेरे दरवाजे पर बैठे थे कभी,
आज मिलते ही मुंह अपना मोड़ लिया|

जो होना नहीं था कभी,
वो कर दिखाया आपने,
एक शीशे ने पत्थर को,
बड़ी आसानी से तोड़ दिया|


हर साँस पर आती थी हिचकियाँ,
अब तो जमाने गुजर गए इन्हें आये,
लगता है आपने मुझे याद करना छोड़ दिया|

गुरुवार, दिसंबर 24, 2009

कोई तलाश नहीं बाकी, तुझे पा लेने के बाद,

हमसफ़र को पाने के बाद मन की अभिव्यक्ति कुछ ऐसी है..

कोई तलाश नहीं बाकी,
तुझे पा लेने के बाद,
कोई आरजू नहीं बाकी,
तुझे मन में बसा लेने के बाद|

मेरी भटकती हुई राह को,
मिल गयी मंजिल ,
तुझे पा लेने के बाद|

जो खो चूका था किनारा,
वो शाहिल हो तुम,
मेरे कस्ती को मिली किनारा,
तुझे पा लेने के बाद |

कोई जुस्तजू अब क्या करें,
कोई जुस्तजू नहीं बाकी,
तुझे पा लेने के बाद|

by --- RAJNI NAYYAR MALHOTRA 9:08 PM

बुधवार, दिसंबर 23, 2009

कब तक मेरी बेबसी को , वो आजमाएंगे,

कब तक हमें,
इंतजार के,
अग्न में,
 जलाएंगे,
कब तक ,
मेरी बेबसी को ,
वो आजमाएंगे,
एक दिन तो,
आएगा ऐसा,
वो हमारी ,
चाहत का ,
लोहा ,
मान जायेंगे.

"रजनी"

मंगलवार, दिसंबर 22, 2009

हमसफ़र मेरे साथ तो दोगे ना

ये नज़्म मेरे जीवनसाथी के लिए .....

हमसफ़र मेरे,   साथ तो दोगे ना
लडखडाये  कभी क़दम  मेरे ,हाथ तो दोगे ना,
आये कभी मेरे पलकों पर आंसू, पोंछ तो दोगे ना,

 ज़िन्दगी का  हर पल  खुशियों से भरा होता नहीं,
कभी ग़म के  बादल  जो छाये ,हिम्मत तो दोगे ना,

जीवन के सफ़र में, आती  हैं मुश्किल राहें,
हर राह के सफ़र में , हमसफ़र बनोगे ना,

"आज हम कह रहे हैं कल तुम भी कहोगे ना"
"हमसफ़र मेरे साथ तो दोगे ना",

मेरे हाथों को सहारा ,अपने हाथों का दोगे ना,
दर्द हो मन में मेरे,आँखों से जान लोगे ना,
बिन कहे मेरी हर बात पहचान लोगे ना,

हमसफ़र जीवन के सफ़र का, होता है हर किसी का,
तुम मेरे हमसफर हो,हमराज़ हो,हमराज़ तो रहोगे ना,
कोई ख़ता  हो ज़िन्दगी में मुझसे, माफ़ तो करोगे ना,

"मरते हैं तुम्हीं पर दिल-ओ-जान   से हम"
ये  लफ्ज़  एक बार ही सही, हमसे कहोगे ना |

हमसफ़र मेरे साथ तो दोगे ना,

तेरे सिंदूर से ज़िन्दगी मेरी सिंदूरी है,
जिंदगी मेरी हर पल सिंदूरी करोगे ना,

हमसफ़र मेरे साथ तो दोगे ना |

BY ----- RAJNI NAYAAR MALHOTRA 8:21 PM

शनिवार, दिसंबर 19, 2009

तू आईना बन गया है, मेरे रूप का,

दीवानगी भी मेरी अब,
हद पार कर गयी है,
मै इसके हर एक हद से,
गुजर रही हूँ,
तेरी एक मुस्कान के लिए,
मै पल,पल मर रही हूँ,
चैन छिन गया है दिल का मेरा,
अब तो उस टूटे हुए,
आईने की तरह बिखर रही हूँ,
सांसे रुकी पड़ी है जैसे,
बड़े उहापोह से गुजर रही हूँ,
कैसा सुकून है फिर भी,
इस तराने में,
तू आईना बन गया है,
मेरे रूप का,
तुझे देख के मैं सवंर रही हूँ,
सांसे रुकी पड़ी है जैसे,
बड़े उहापोह से गुजर रही हूँ|

शुक्रवार, दिसंबर 18, 2009

प्यार जिसे मिल जाए,

कहते हैं ,
प्यार जिसे ,
मिल जाए,
उसके,
जिन्दगी में,
गूंजती ,
शहनाई है,
और,
जिसके ,
हिस्से में,
ना आई,
मुहब्बत ,
उसकी ,
जिन्दगी में तो ,
दर्द,
जुदाई,
और,
तन्हाई है.

"rajni"

गुरुवार, दिसंबर 17, 2009

मधुशाला भी छोटा पड़ जाये, इतना मद है उनके आँखों में,

मेरी ये नज्म नायक तथा नायिका दोनों के लिए है..........

मधुशाला भी फीका  पड़ जाये,
इतना मद है उसकी  आँखों में,

हर  मन  को  चंचल कर जाये ,
ऐसी खुशबू है उनकी  सांसों में,

मिसरी    भी  फीकी   पड़ जाए,
ऐसी  मधुरता  उनकी  बातों  में,


दूर  होकर  भी  वो  पास  है  मेरे,
इस  तरह  बसा  है  मेरी  यादों मैं| 

हर    शह    को   मात   दे  जाये   ,
ऐसी  अदा   है  उनकी  चालों  में |

मधुशाला भी  फीका   पड़  जाये,
इतना  मद है  उसकी  आँखों  में.

"रजनी"

मंगलवार, दिसंबर 15, 2009

यूँ किस्त दर किस्त ना मार दे

KUCHH SHER MERI CREATION KE........
दरिया भरा है सामने पानी से,
पर दिल बेताब है,
तेरे आँखों के सागर में डूब जाने के लिए|
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सागर में रहने का डर हमें नहीं,
कस्ती लिए फिरते हैं हम तो,
तूफ़ान के इंतज़ार में|
*****************
क्या खूब मिला है सिला इंतज़ार का,
वो आते हैं हमसे मिलने,
मेरे जाने के बाद|
*****************
जब हम नहीं होते हैं,वो चाँद मुस्कुराता है,
हमारे आते ही सामने,
बादल की आगोश में छूप जाता है|
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बहुत जी लिया तेरे शर्तो पर,
अब तो ये क़र्ज़ तू उतार दे,
दे दे सजा कोई ऐसी,
यूँ किस्त दर किस्त ना मार दे|
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BY------ RAJNI NAYYAR MALHOTRA 9:18PM

हर राह यदि बिन मोड़ गुजर जाए

हर राह में ,
 यदि फूल बिछे हों,
हर राह यदि ,
बिन मोड़ ,
गुजर जाए,
 अँधेरा ना हो तो,
रौशनी कि,
जरुरत को ,
कोई ना,
जान पाए,
ज़िन्दगी भी,
एक राह है,
जो फूल के,
संग शूल,
अँधेरे के संग,
प्रकाश की,
चलते कदम को ,
एहसास कराए.

"रजनी"

शुक्रवार, दिसंबर 11, 2009

एक चुटकी सिंदूर के बदले, उसे साँसे गिरवी दे देती है,

मेरे मन में काफी सालों से एक द्वंद चल रहा था,समाज में नारी के स्थान को लेकर,
मन कुछ कड़वाहट से भरा रहा,आज काफी सोंचते हुए एक रचना लिख रही उनकी कुछ (नारी)
की बेबसी पर जो .........ममता,त्याग,वात्सल्य ,विवशता संस्कार,कर्तव्य, एक चुटकी सिंदूर ........ और जीवनपर्यंत रिश्तों की जंजीर में बंधकर, अपनी हर धड़कन चाहे इच्छा से,चाहे इच्छा के बिरुद्ध बंधक रख देती है..जन्म से लेकर मृत्युपर्यन्त वह बस रिस्तों को निभाने में ही रह जाती है,विवाह के बाद विवाह के पूर्व खुलकर अपनी साँसें भी नहीं ले पाती,पर विवाह के बाद नए रिस्तों में बंध कर वो तो अपना अस्तित्व ही खो देती है, वो खुद को गिरवी रख देती है,अपने ही अर्धांगिनी होने का मतलब भी खो देती है.......... आशा है मेरे विचारों
से आपलोग सहमत हों.......

मेरी एक कोशिश है (उन नारियों के लिए जो खुद को बेबस बना कर रखी हैं ) उनके लिए ... बंधन में बंधो,पर खुद को जक्ड़ो नहीं..........

अर्धांगिनी का मतलब समझ जा,
तेरी खुद की सांसों पर भी,
तुम्हारा अधिकार है,

एक चुटकी सिंदूर के बदले,
उसे साँसे गिरवी दे देती है,

लहू से अपने,सींचे आँगन जिसका,
खुशियाँ अपनी सूद में उसे देती है,

त्याग और ममता की मूरत बनकर,
कब तक और पिसोगी तुम,

आँखों में आँसू रहेगा कबतक ?
कबतक होंठों पर झूठी ख़ुशी होगी ?

कब तक रहोगी सहनशील ?
कब तक तेरी बेबसी होगी ?

त्याग ,दया,ममता, में बहकर,
अबतलक पिसती आई,

जिस सम्मान की हक़दार हो,
अपनी खता से ही ना ले पाई,

शर्म, हया तेरा गहना है,
बस आँखों में ही रहे तो काफी है,

खुद को बेबस जानकार,
ना दबा दे आरजू सारी,

पहचान ले खुद को,
तेरा ही रूप रही दुर्गा काली,

मांगने से नहीं मिलता,
छिनना पड़ता अधिकार है,

अर्धांगिनी का मतलब समझ जा,
तेरी खुद की सांसों पर भी,
तुम्हारा अधिकार है,