मंगलवार, जुलाई 20, 2010

बादलों की , आगोश में जाकर, चाँद और निखर गया,

"बादलों की ,
आगोश में जाकर,
चाँद और निखर गया,
मिली जब ,
चांदनी उससे ,
बहुत उलझन में,
पड़ गयी ."
"rajni "

6 comments:

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत खूब .जाने क्या क्या कह डाला इन चंद पंक्तियों में

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत बढ़िया.

बेनामी ने कहा…

kya baat hai maa'm
han badlon ne chand ko samajh paya..........

रजनी नैय्यर मल्होत्रा ने कहा…

hardik sukriya aap sabhi ko

amrendra "aks" ने कहा…

bahut prabhavsaali .............

रजनी नैय्यर मल्होत्रा ने कहा…

sukriya amrendra ji