शनिवार, नवंबर 28, 2009

आज कुछ ना कहेंगे

meri ye kavita maine 10 years pahle likhi thi,
aaj aapsab ke beech rakh rahi hun.........
सोंच लिया है मैंने,
आज कुछ ना कहेंगे,
तुम सुनाओ बस,
आज तुम्हें सुनेगें,
सोंच लिया है मैंने ,
आज सुनना है तुमसे,
तेरे हर लब्ज़ कों,
जिगर थाम कर सुनेगें,
कुछ खनक होगी बातों में,
कुछ तन्हाई होगी,
कुछ तो उतर जाएगी,
सीधे जज्बातों से दिल में,
जब कभी तन्हा होंगे सुनेगें उन्हें,
सोंचेगें तेरे हर बात को,
कर जायेगी जो तन्हा कोई महफिल,
सोंच लिया है मैंने ,
आज कुछ ना कहेंगे,
तुम सुनाओ बस,
आज तुम्हें सुनेगें,
तुम्हारी बातें मन में लिखीं हैं ,
अब तक डायरी कि तरह,
जो गुनगुनाती हूँ ,
खालीपन में शायरी कि तरह,
कभी हंस जाती हूँ,
कभी बोल पड़ती हूँ,
कभी,कभी तेरी बातें ,
ऐसी लगती हैं ,
जैसे घुंघुरू बज उठे हों कानों में,
लगता है कभी उतर जायेंगे,
तेरे बोल खाली पैमानों में,
सोंच लिया है मैंने,
आज कुछ ना कहेंगे,
तुम सुनाओ बस,
आज तुम्हें सुनेगें,

1 comments:

amrendra "aks" ने कहा…

"खालीपन में शायरी कि तरह,"

BAhut Khoob Mam............

"wo dard hi aisa tha hum chah ker bhi uf na ker sake "